Skip to main content

ग़ज़ल-ख़ुमार बाराबंकवी

एक पल में एक सदी का मज़ा हमसे पूछिए,
दो दिन की ज़िन्दगी का मज़ा हमसे पूछिए।
भूले हैं रफ़्ता-रफ़्ता उन्हें मुद्दतों में हम,
किश्तों में ख़ुदकुशी का मज़ा हमसे पूछिए।
आगाज़-ए-आशिक़ी का मज़ा आप जानिए,
अंजाम-ए-आशिक़ी का मजा हमसे पूछिए।
जलते दियों में जलते घरों जैसी लौ कहाँ,
सरकार-ए-रोशनी का मज़ा हमसे पूछिए।
वो जान ही गए कि हमें उनसे प्यार है,
आँखों की मुखबिरी का मज़ा हमसे पूछिए।
हँसने का शौक हमको भी था आपकी तरह,
हँसिए मगर हँसी का मज़ा हमसे पूछिए।
'ख़ुमार बाराबंकवी'

Popular posts from this blog

हिंदी भाषा की विशेषताएँ

हमारी हिंदी हिंदी का उद्भव भाषाओं की जननी संस्कृत से हुआ है जो आज  तकनीकी क्षेत्र में प्रयोग के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा मानी जा रही है.हिंदी के व्याकरणिक नियम प्रायः अपवाद-रहित हैं इसलिए आसान हैं.हिंदी की वर्णमाला दुनिया की सर्वाधिक व्यवस्थित वर्णमाला है.हिंदी की लिपि (देवनागरी) विश्व की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है.हिंदी का शब्दकोष बहुत विशाल है और एक-एक भाव को व्यक्त करने के लिए सैकड़ों शब्द हैं.हिंदी दुनिया की दुनिया की तीसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है.हिंदी अखिल भारत और दुनिया के कई देशों (अमेरिका सहित) में बोली और समझी जाने वाली भाषा है.हिंदी दुनिया की सर्वाधिक तीव्रता से प्रसारित हो रही भाषाओं में से एक है.हिंदी सबसे सरल और लचीली भाषा है.ऐसे समय में जब सारी दुनिया की निगाहें भारत की ओर लगी हैं, भारत के विकास के साथ ही दुनिया में हिंदी का महत्व बढ़ना भी निश्चित है.देश को पुन: विश्वगुरु बनाने के साथ ही हिंदी को भी विश्वभाषा बनाएँ.कृपया मातृभाषा का प्रयोग करें; हिंदी का प्रयोग करें.
Image courtesy:ashokvichar.blogspot.com

चार वेद, छ: शास्त्र, अठारह पुराण

सनातन धर्म का आधार अग्रोल्लिखित साहित्य समुच्चय है जिसका लोहा पूरा विश्व मानता है।

चार वेद-


ऋग्वेदसामवेदयजुर्वेदअथर्ववेद
(विशेष:ऋग्वेद को विश्व के पुरातनतम साहित्य का गौरव प्राप्त है)

छ:शास्त्र-
शिक्षाकल्पव्याकरणनिरुक्तछंदज्योतिष
अठारह पुराण-


विष्णुभागवतनारदगरुड़पद्मवाराहब्रह्मब्रह्माण्डब्रह्म-वैवर्तमार्कंडेयभविष्यवामनवायुलिंगस्कन्दअग्निमत्स्यकूर्म
इसमें  निम्नलिखित सामग्री और जोड़ दी जाए तो विश्व का कोई भी पुस्तकालय इसकी बराबरी कर पाने में सक्षम नहीं होगा और कोई भी प्रश्न अनुत्तरित नहीं रहेगा।वह है-
श्रीमद्भगवद्गीता और
रामचरितमानस


हमें गर्व है हम भारतीय हैं।
Image courtesy: www.google.com ww.vedpradip.com
आधुनिक संत और धर्माचार्य अपना 'उद्धार' करने में तो सफल हो जाते हैं किन्तु अन्य किसी का कदापि नहीं। वर्तमान समाज में व्याप्त धार्मिक विकृतियों और विद्रूपताओं के लिए ये तथाकथित धर्मोद्धारक कम उत्तरदायी नहीं हैं।इस समय चतुर्दिक धर्म का विकृत रूप दृष्टिगोचर होता है।सर्वत्र धार्मिक कट्टरता, दुराग्रह, और अन्य धर्मों के प्रति विद्वेष की भावना ही परिलक्षित होती है।ये धर्म के ठेकेदार धर्म के नाम पर समाज को जोड़ने का नहीं अपितु तोड़ने का कम कर रहे हैं, जिसके लिए हमें जागरूक होने की आवश्यकता है।ये समाज में अकर्मण्यता को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।वर्तमान समय में धर्मोपदेश मात्र से किसका कितना कल्याण हो रहा है यह तो कह पाना मुश्किल है, किन्तु प्रवचन सभाओं में उमड़ने वाली भारी भीड़ यह आभास अवश्य कराती है कि देश की जनशक्ति का कितना अपव्यय हो रहा है!